Monday, May 30, 2016

भोंडे खुले-सांडो का समूह!

गुंडाराज की शाज़ पे
चिड़ियों को नोचने-खरोंछने
निकले आवारा भेड़िए
संस्कारी लबादे ओड
Siniskaari परिवार संग
चौराहों पे
घूम रहे थे वो

नथुनि में लिए
ब्लड स्टेंड पॅड्स के टुकड़े
मलमूत्र से मूह सना हुआ
घूस... 
महम की "रोडवेस-बस!" में 
नथुनि शीट पे रगड़ते हुए
शेखी हांक रहे थे वो

मुरथल के पास
किसी ढाबे में
संस्कारी परिवार संग
"दल-बीरों"* के रेंगते हुए कीड़े
बड़े संस्कार से समेट रहे थे
इंग्लीश और इंडियन कोमोडस को!*

बड़े बड़े दरबारों में
बड़े बड़े पतरकारों में
गूँज रही थी 
उस भोंडेपन की
आयाशी की कहानियाँ
बता रहे थे वो

नापी गयी कैसे 
गोलाई, उँचाई, चौड़ाई
कहाँ फिट हुए कैमरे
और कहाँ उड़ी तस्तरियाँ*
कैसे चला कसाई खेल
कैसे कहाँ धुके कलाम*

माँ, बहन, बेटी सब गवाह थी
उनके इस संस्कारी रूप की!
कुछ सोन-कांडी शामिल भी थी
कांड़ाओं  संग दंभीं हुंकार के साथ
शायद ये कहते हुए
हम (औरतें) किसी से कम नही!

दिल्ली की बद-शाहत*
और चंडीगड़ के बाबू
रंगीनियाँ पॅंच-कूल की
और गुरु-गाओं का गरूर
खट्टर-हुडा सरकारी-
संस्कारी-अदब (!) को समर्पित
भोंडे खुले-सांडो का समूह वो!

ब्लड स्टेंड पॅड्स (Blood Stained Sanitary Pads)

*उड़ी तस्तरियाँ  (Drones) 

दल-बीरों (Bir!?) rather yuck species following RajGoons/PR gang!

*इंग्लीश और इंडियन कोमोडस line ("Sanskari Mard", put cameras in washrooms and watch how Indian women go to relieve themselves. Then these sanskaaris do cherish that shit on their dining tables with families, with friends, with their so-called gurus/aakas!).

धुके कलाम (Dr. Abdul Kalam/Missile Man... Reminds Satellites and human's inhuman heights!)

*दिल्ली की बद-शाहत (Centre Power/Bad-Shahs)

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