Saturday, November 16, 2013

Vultures of Our Culture!!

भेड़ियों के बीहड़ में  कितनी ही बार
इंसानी सूरत वाले दरिंदों का अवतार देखा है
ज्‍यादातर इन संस्कृति के ठेकेदारों को हमने
ठेकेदारी की आड़ में कितनी ही बार
जिन मर्यादाओं का शेहरा ये बांधे फिरते हैं
उन्ही मर्यादाओं को लांघते, रोंदते देखा है!

संस्कृति जैसे इनके एक्लौते बाप की जागीर हो
जस-से-तस् ना होना स्वरूप हो उसका
खड़ा पानी हो जैसे वो सदियों से नाले का
फिर क्यूं इनके रेत-से-किल्लों (?) को
कभी इसको, कभी उसको धवस्त करते सुना है
सात बार दिल्ली को उखड़ते-बस्ते सुना है!

इन कबीलाइओं को कंगारू कोर्ट्स बनाकर
अफगानिस्तानी तालिबान की तरज पे
कभी रिश्तों की धजियां सरेआम उड़ाते
तो कभी बिन सर-पर के फतवे निकालते
बहुत कुछ तार-तार करते देखा है
और कभी तो खून से भी लथपथ सना देखा है!!
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Off late started reading lil-bit about evolution of cultures. Yes! Along with humans's origin, migration, inflow and outflow of genes and their impact on human's health and lifestyle in different regions of world with special emphasis on Northern India. Such an interesting world of human's survival and reigning of this planet. Even more interesting aspect is the answers to some of my own questions! May be in some other post.

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